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11 September 2007

मरहम

रोज़ होती है दर्द की नुमाइश
तकनीक के इस बेमिशाल डब्बे में,
कुछ भी हो
ख़बर का जामा पहना देते है
हम उसे,
अलग अलग दुकाने सजी है
पर सामान एक ही है,
वही लूप मे घूमती घटनाये
वही होड़ मे उछलती सूचानाये.

रिश्ते और घर का
कोना-कोना बे परदा हो गया है
इस TRP के चक्कर में
पर वो है कि मिलाती ही नही.

कोई करता है हकीकत की बात,
कोई सच की
कोई सबसे तेज़ है,
तो कोई बदलना चाहता है
तस्वीर देश की.

सब है पढे लिखे
ओहदे वाले
नज़र रखते है हर चीज़ पर
ऊपर से.

किसी गुरू ने कहा था
कि बेटा हर ईमारत की मजबूती
उसकी नींव मे होती है.
आज सोचता हूँ कि
इस देश की नींव मे क्या है
अगर आम जनता
तो ये डिब्बा वो क्यों नही दिखाता
कुन करता है नुमाइश
सरे आम हर दर्द की

कुछ मरहम दे
तो सुकू मिले सबको...

चिट्ठाजगत पर सम्बन्धित: कविता, रोज़, नुमाइश, ख़बर, रिश्ते, घर, हकीकत, सच, देश, नज़र, नीव, दर्द, मरहम, सुकू, yatish, yatishjain, यतीष, hindi, poem, क़तरा-क़तरा, Qatra-Qatra,

5 comments:

Udan Tashtari said...

हर ईमारत की मजबूती
उसकी नींव मे होती है.
आज सोचता हूँ कि
इस देश की नींव मे क्या है


--विचारणीय तथ्य है. सभी यही सोच रहे हैं.

Shastri JC Philip said...

"इस देश की नींव मे क्या है
अगर आम जनता
तो ये डिब्बा वो क्यों नही दिखाता
कुन करता है नुमाइश
सरे आम हर दर्द की "

यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है. यदि इस पर एकाध लेख लिख सकें तो बहुत अच्छा होगा -- शास्त्री जे सी फिलिप



आज का विचार: चाहे अंग्रेजी की पुस्तकें माँगकर या किसी पुस्तकालय से लो , किन्तु यथासंभव हिन्दी की पुस्तकें खरीद कर पढ़ो । यह बात उन लोगों पर विशेष रूप से लागू होनी चाहिये जो कमाते हैं व विद्यार्थी नहीं हैं । क्योंकि लेखक लेखन तभी करेगा जब उसकी पुस्तकें बिकेंगी । और जो भी पुस्तक विक्रेता हिन्दी पुस्तकें नहीं रखते उनसे भी पूछो कि हिन्दी की पुस्तकें हैं क्या । यह नुस्खा मैंने बहुत कारगार होते देखा है । अपने छोटे से कस्बे में जब हम बार बार एक ही चीज की माँग करते रहते हैं तो वह थक हारकर वह चीज रखने लगता है । (घुघूती बासूती)

preetilata said...

aaj ke is andhadhund daur main "sach" kahi koho gaya hai..
aam insaan ki kaun sune..???

durga said...

yatish ji

badiya likha hai.

aur maine aapke blog ko bhi 5 stars diye hain!

agar uchit lage to blog par chitthalok rating box bhi laga dijiye...

हरिराम said...

दर्द से छुटकारे के लिए - अपने विचारों को उलटाएँ - चींटी काट रही है तो सोचें कि अहा-- कितना प्यारा प्यारा दर्द हो रहा है, उस दर्द का आनन्द उठाएँ, दर्द भी अनुभूति देगा।

 

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