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08 September 2007

सपना हो गया सपना

अर्से पहले
एक सपना देखा था
आज वो पूरा हुआ
पर
वो सपना अपना नही रहा,
जब हक़ीकत ने उसे छुआ
तो मुआ मुझे ही छोड गया

आज जब खुलती हैं
शम्पैन उसकी हर कामयाबी पे
थोडा दर्द देती हैं
पर खुश भी बहुत
हो लेता हूँ ये देख कि
जो बीज बोया था
वो आज कितनों को
छाया दे रहा

जो आग सुलगाई थी
सर्द रातों में
आज सेकती हैं कईयों को
पर ठिठुरता रहता हूँ मै ,
अकेला घूमता हूँ
इस भरी भीड़ में,
तनहाइयां समेटता हूँ
इस शोर में.

साथ चलना सबके
दूभर हो चला हैं
विश्वाश का साथ अब
दूर हो चला हैं

मै मेरे साथ रहूँ
अब यही दुआ करता हूँ
क्यों कि
मुझमें मै हूँ
तो मै हुआ करता हूँ

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