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18 August 2007

केचुली


नागपंचमी हैं,
आज के दिन
साँप को
दूध पिलाया जाता हैं,
सपेरों को
पुराने कपड़े आदी
दान किये जाते हैं,
एसा देखा था बचपन में,
पर आज
सुबह से से इंतजार हैं
कोई सपेरा नही आया।

सपोलो का शहर हैं ये
शायद
यहाँ लोग
कपड़े नही
केचुली बदलते हैं...

27 July 2007

वो रास्ते

लोग मिलते हैं बिछड़ जाते हैं
कभी किसी बात पे बिगड़ जाते हैं,
पता भी नही चलता
और सालों बाद
ऐसे आते हैं
जैसे एक अजनबी।
शायद हम कहीं मिले थे।
बरसों से
एक ही शहर में रह रहे हैं,
वो रस्ते भी तय करते रहे हैं
जहाँ कभी साथ-साथ चला करते थे।
मै जब भी उन रास्तों पे
जाता हूँ आज,
अकेला नहीं होता,
पर वो रास्ते
जब भी मुझे अकेला देखते हैं
कहते हैं,
एक बार तो साथ आओ
तुम उसके,
अकेले अच्छे नही लगते...