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10 September 2007

शब्दकार

शब्द गीत बनके बोल को अमर करते है
शब्द बोल बनके आवाज़ को अमर करते है,
शब्द बस जाते है दिलों मे धुन बनके.

आवाज़ शब्दों से ही जानी जाती है
शब्द गड़ने वाले खो जाते है
जैसे आवाज़ गुमनाम सी,
बोल बेमानी से,
धुन अनजान सी.

शब्दों का कोई काम्पटीसन नही होता
आवाजों का होता है प्रदर्शन
शब्द आत्मा है
शब्द नींव है
शब्द ही सहारा देते है
आवाज़ की दुनिया को

पर
आवाज़ क्या देती है
शब्दों को
शब्दकार को...

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23 June 2007

बे-आवाज़ सन्नाटा

उसने कहा
मै तुम्हारा कुछ करके जाऊंगा,
उसने कहा
मै तुम्हें उनसे मिलाउंगा,
उसने कहा
कि कल फ़ोन आयेगा तुम्हें,
उसने कहा
मुझे तेरी ज़रूरत पड़ेगी,
उसने कहा
ये करेगा,उसने कहा
वो करेगा,

लगता हैं
एक ख्वाब था
जिसमें मै
सुन रहा था।
आवाज़ कोई नही थी,
एक बे-आवाज़ सन्नाटा था,
अनसुनी यादों का,
अधूरे वादों का...

31 May 2007

इंतज़ार

एक हैं जो
आये दिन कहते है
कल आऊंगा,

अरसा हो गया पर
वो कल नहीं आया,
जिस कल में हमें
बीते दिनों का काम
पूरा करना था,

साल होने को है ....

ये साल भी कल-कल की आवाज़ मै गुज़रा।