कभी रिश्ते एसे हो जायेगे
जैसे किसी इमेल मे आयी हुई बेकार मेल
जो रोज आती है और अपने आप ही
चली जाती है जन्कमेल मे,
या अंगुलियां एक दम से
चली जाती डिलीट पे
सोचा नही था।
कभी मिले तो कहते थे
अमा याद भी करलिया करो,
अब याद करते है
तो कहते है तुम बिजी होगे
इसलिये तुमसे सम्पर्क नही किया,
कितने समझदार होते है ये
कहने वाले,
बिन कहे ही मेनेज करते हैं
अपनो का वक़्त,
इस तेज रफतार जिन्दगी मे
जहा फ्री टाकटइम वाले मोबाइल है
वीडियो टाक है,
ईमेल है
और नजाने कितने साधन
मेल मिलाप के,
विज्ञान ने अब
मीलो का फ़ासला
एक क्लिक की दूरी तक
सीमित कर दिया है.
पर
बहाने वही पुराने...