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20 August 2007

पदचाप

सब को
साथ ले चलने की
कोशिश करता था,
सबके साथ चलने की
कोशिश करता था।

उम्र के इस मध्यांतर मे,
थोड़ा रुका;
तो देखा
कोई साथ नही था।

आज अकेला चला;
अकेला ही जान कर
अपने आप को।
पर ये क्या हुआ
ना कोई साया था
ना थी कोई पदचाप...

29 July 2007

सिग्नल

मै जब भी
उस रेड लाईट से गुज़रता हूँ
जहाँ मैंने कभी उससे कहा था
कि जब तू बड़ा आदमी हो जाएगा
एक बड़ी कार में
यहाँ से निकलेगा,
और मै इस जगह
रोड क्रोस करने के लिए
खड़ा होऊंगा
तो तू अपने ड्राइवर से बोलेगा
सिग्नल तोड़ दे
वो आ रहा हैं,
तुम हस पडे थे।

ये सिग्नल भी
कितने अजीब होते हैं दिल के,
लाख कोशिश करो
टूटते ही नहीं,
बस रंग बदलते रहते हैं...

चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी