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13 August 2007

नुमाइश
















यदा
-कदा लोग
पूछते हैं मुझसे
अरे वो कहॉ हैं
आज कल
जो रहता था
साथ तुम्हारे?

अतीत का पन्ना था
किसी ने फाड़ कर
जहाज बना
उड़ा दिया.
कल दिन भर
धूड़ा उसे
नही मिला,
शरहद पार गया
लौटा नही शायद।

आज
एक नुमाइश में
देखा था,
किसी का चेहरा
हू-बहू
वही था
पर
वह नही था...